सोमवार, 27 जनवरी 2025

साधु कहावत कठिन है , लम्बा पेड़ खजूर saadhu kahaavan kathin hai, lamba ped khajoor Kabir Das


 

साधु कहावत कठिन है, लम्बा पेड़ खजूर।

चढ़े तो चाखे प्रेम रस, गिरे तो चकनाचूर।।

कहीं कहीं यह दोहा इस प्रकार भी लिखा गया है:

साधु कहावन कठिन है, लम्बा पेड़ खजूर।
चढ़े तो चाखै प्रेम रस, गिरै तो चकनाचूर।।

शब्दार्थ:

  1. साधु: संत, सज्जन, विद्वान।

  2. कहावत/कहावन: प्रसिद्ध उक्ति, प्राचीन कहानियों से निकली शिक्षा।

  3. कठिन: कठिनाई भरा, चुनौतीपूर्ण।

  4. लम्बा: ऊँचा, ऊर्ध्वमुखी।

  5. खजूर: एक प्रकार का पेड़ जो ऊँचा होता है और उसके फल मीठे होते हैं।

  6. चाखे/चाखै: स्वाद लेना, अनुभव करना।

  7. प्रेम रस: प्रेम, आनंद और शांति का अनुभव।

  8. चकनाचूर: पूरी तरह से टूट जाना, बिखर जाना।


सरल अर्थ:

यह दोहा यह कहता है कि साधु बनना या उसकी संगति प्राप्त करना बहुत कठिन है, जैसे खजूर के पेड़ पर चढ़ना। खजूर के पेड़ पर चढ़ने पर मीठे फल का स्वाद तो मिलता है, लेकिन गिरने पर व्यक्ति पूरी तरह बिखर जाता है।


पूर्ण व्याख्या:

इस दोहे में साधु, संत और उनके जीवन की कठिनाई की तुलना खजूर के पेड़ से की गई है। खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा और सीधा होता है। उस पर चढ़ना बेहद कठिन होता है, और यदि कोई चढ़ भी जाए तो फल तक पहुँचकर प्रेम और शांति का स्वाद ले सकता है। साधु का जीवन भी ऐसा ही होता है। साधु बनने का अर्थ है तमाम सांसारिक मोह-माया से मुक्त होना, जो बहुत कठिन है।

यदि कोई व्यक्ति साधु के बताए मार्ग पर चलता है, तो उसे प्रेम, शांति और आनंद का अनुभव होता है। परंतु यदि साधना में कोई चूक हो जाए या व्यक्ति अपने मार्ग से विचलित हो जाए, तो उसका जीवन बिखर सकता है।

इस दोहे का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि जीवन में महान कार्य, जैसे संत बनना या आध्यात्मिकता की राह पर चलना, आसान नहीं होते। यदि व्यक्ति इस कठिन मार्ग को पार कर लेता है, तो उसे अनमोल आनंद की प्राप्ति होती है। लेकिन, इस मार्ग में असफलता का अर्थ है गिरकर पूरी तरह टूट जाना।

यह दोहा हमें यह शिक्षा देता है कि हमें जीवन में कठिनाइयों का सामना करने से नहीं डरना चाहिए। बल्कि, हमें पूरी दृढ़ता और विश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। यदि हम अपने प्रयास में सफल होते हैं, तो हमें अद्भुत आनंद की प्राप्ति होगी।


निष्कर्ष:

इस दोहे के माध्यम से यह बताया गया है कि साधु का जीवन और उनकी शिक्षा को अपनाना आसान नहीं है। यह कार्य एक चुनौतीपूर्ण यात्रा की तरह है, जो साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प की माँग करती है। इस यात्रा का फल मीठा और सुखदायक है, लेकिन असावधानी विनाशकारी हो सकती है।

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